विस्तृत विवरण:
भाग १: IPO क्या है? (मूल अवधारणा)
IPO (Initial Public Offering) का मतलब है “प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम”। यह वह प्रक्रिया है जब कोई निजी कंपनी पहली बार आम जनता को अपने शेयर्स बेचती है और स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होती है। IPO के माध्यम से कंपनी पब्लिक लिमिटेड कंपनी बन जाती है और उसके शेयर्स स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने लगते हैं।
उदाहरण के लिए:
२०२१ में ज़ोमेटो का IPO
२०२० में SBI कार्ड का IPO
२०२२ में LIC का IPO (भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO)
IPO के मुख्य उद्देश्य:
पूंजी जुटाना: व्यवसाय के विस्तार, शोध और विकास, कर्ज चुकाने के लिए।
सार्वजनिक दर्जा: कंपनी की पहचान बढ़ती है, विश्वसनीयता बढ़ती है।
निवेशकों को निकासी मार्ग: प्रमोटर और प्रारंभिक निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।
भाग २: IPO के प्रकार
फिक्स्ड प्राइस इश्यू (Fixed Price Issue):
कंपनी शेयर की कीमत पहले से तय करती है।
निवेशकों को बुकिंग के समय ही पूरी राशि जमा करनी होती है।
उदाहरण: कई छोटे IPO।
बुक बिल्डिंग इश्यू (Book Building Issue):
कंपनी एक प्राइस बैंड (कम और उच्चतम कीमत) निर्धारित करती है।
निवेशक उस बैंड के भीतर अपनी बोली लगाते हैं।
बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के बाद अंतिम कीमत तय होती है।
उदाहरण: अधिकांश बड़े IPO।
ऑफर फॉर सेल (OFS):
मौजूदा शेयरधारक (जैसे प्रमोटर) अपने शेयर बेचते हैं।
इसमें कंपनी को कोई पैसा नहीं मिलता।
भाग ३: IPO में भाग लेने के लिए पात्रता
डीमैट अकाउंट: IPO में आवेदन करने के लिए डीमैट अकाउंट अनिवार्य है।
ट्रेडिंग अकाउंट: ब्रोकर के साथ ट्रेडिंग अकाउंट।
पैन कार्ड: आवेदन के लिए पैन अनिवार्य है।
निवेशक श्रेणी:
रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Individual Investors – RII): ₹२ लाख तक के आवेदन।
नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII): ₹२ लाख से अधिक के आवेदन।
क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB): संस्थागत निवेशक।
बैंक अकाउंट: ASBA (Applications Supported by Blocked Amount) के लिए।
भाग ४: IPO आवेदन प्रक्रिया – चरण दर चरण
चरण १: IPO की जानकारी प्राप्त करें
IPO का नाम, प्राइस बैंड, लॉट साइज, खुलने और बंद होने की तिथि।
ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पढ़ें (सेबी वेबसाइट पर उपलब्ध)।
चरण २: ब्रोकर के प्लेटफॉर्म पर जाएँ
अपने ब्रोकर (ज़ेरोधा, उपस्टॉक्स, एंजल वन) के ऐप या वेबसाइट पर लॉगिन करें।
“IPO” सेक्शन में जाएँ।
चरण ३: आवेदन फॉर्म भरें
निवेशक श्रेणी चुनें (रिटेल इन्वेस्टर)।
लॉट की संख्या चुनें (IPO की लॉट साइज के अनुसार)।
कीमत चुनें (फिक्स्ड प्राइस या बुक बिल्डिंग में बोली)।
डीमैट अकाउंट विवरण दर्ज करें।
बैंक अकाउंट विवरण दर्ज करें।
चरण ४: ASBA प्रक्रिया
ASBA का मतलब है “आवेदन राशि अवरुद्ध”।
बैंक आपके खाते से आवेदन राशि ब्लॉक कर देता है, निकालता नहीं।
IPO आवंटन न होने पर राशि अनब्लॉक हो जाती है।
आवंटन होने पर राशि काट ली जाती है।
चरण ५: आवेदन जमा करें और पुष्टिकरण प्राप्त करें
आवेदन जमा करने के बाद एक पावती नंबर (Acknowledgement Slip) मिलता है।
इसे सुरक्षित रखें।
चरण ६: आवंटन और रिफंड
IPO बंद होने के ६-७ दिनों के भीतर आवंटन होता है।
शेयर आपके डीमैट अकाउंट में जमा हो जाते हैं।
अगर आवंटन नहीं हुआ, तो ब्लॉक राशि अनब्लॉक हो जाती है।
चरण ७: लिस्टिंग और ट्रेडिंग
आमतौर पर आवंटन के ७-१० दिनों के भीतर लिस्टिंग होती है।
शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग शुरू हो जाते हैं।
भाग ५: IPO लॉट साइज और न्यूनतम निवेश
IPO में शेयर “लॉट” में खरीदे जाते हैं। एक लॉट में शेयरों की संख्या IPO के आधार पर तय होती है।
उदाहरण:
अगर लॉट साइज ५० शेयर है और प्राइस बैंड ₹५००-५५० है, तो:
न्यूनतम निवेश = ५० × ५०० = ₹२५,०००
अधिकतम निवेश = ५० × ५५० = ₹२७,५००
रिटेल निवेशक अधिकतम ₹२ लाख तक के लिए आवेदन कर सकते हैं। यानी, कई लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
भाग ६: IPO आवंटन कैसे तय होता है?
IPO में आवंटन लॉटरी सिस्टम (प्रोरेशा आधारित) से होता है। यदि IPO ओवरसब्सक्राइब होता है (आवेदन अधिक, शेयर कम), तो:
रिटेल इन्वेस्टर्स: इन्हें प्राथमिकता दी जाती है। सेबी नियम के अनुसार, IPO के कम से कम ३५% शेयर रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित होते हैं।
लॉटरी सिस्टम: अगर आवेदन अधिक हैं, तो कंप्यूटराइज्ड लॉटरी द्वारा आवंटन होता है।
प्रोरेशा (Proration): कभी-कभी निवेशकों को उनके आवेदन से कम शेयर आवंटित होते हैं।
आवंटन की जाँच कैसे करें?
ब्रोकर की वेबसाइट/ऐप पर।
रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर (लिंक IPO के डॉक्यूमेंट में दिया होता है)।
BSE या NSE की वेबसाइट पर IPO आवंटन सेक्शन में।
भाग ७: IPO डॉक्यूमेंट्स को समझना
DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस):
IPO का मुख्य दस्तावेज।
कंपनी का व्यवसाय, वित्तीय विवरण, जोखिम, प्रमोटर विवरण।
सेबी वेबसाइट पर उपलब्ध।
RHP (रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस):
DRHP का अंतिम संस्करण।
IPO कीमत और अन्य विवरण के साथ।
अवलोकन पुस्तिका (Abridged Prospectus):
RHP का संक्षिप्त रूप।
आवेदन फॉर्म के साथ जुड़ा होता है।
DRHP में क्या देखें?
व्यवसाय मॉडल और प्रतिस्पर्धा।
वित्तीय प्रदर्शन (राजस्व, मुनाफा, कर्ज)।
जोखिम कारक।
IPO के उद्देश्य (फंड का उपयोग कैसे होगा)।
प्रमोटरों का इतिहास।
भाग ८: IPO ग्रेडिंग क्या है?
IPO ग्रेडिंग क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (जैसे CRISIL, ICRA) द्वारा दी जाती है। यह ग्रेड IPO के मूल्यांकन (वैल्यूएशन) और जोखिम के बारे में बताती है, न कि कंपनी की गुणवत्ता के बारे में।
ग्रेड स्केल:
5/5: बहुत मजबूत
4/5: मजबूत
3/5: औसत
2/5: कमजोर
1/5: बहुत कमजोर
ध्यान रखें: ग्रेडिंग सिर्फ एक सलाह है। इसके आधार पर अकेले निर्णय न लें।
भाग ९: IPO में निवेश के फायदे
लिस्टिंग गेन की संभावना: IPO कीमत से अधिक पर लिस्ट हो सकता है।
कंपनी के विकास में शुरुआत से हिस्सा।
पारदर्शिता: सार्वजनिक कंपनियों को नियमित रूप से वित्तीय विवरण देना होता है।
रिटेल निवेशकों को प्राथमिकता।
दीर्घकालिक संभावनाएँ: अगर कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है।
भाग १०: IPO में निवेश के नुकसान और जोखिम
लिस्टिंग पर नुकसान: IPO कीमत से कम पर भी लिस्ट हो सकता है।
अधिक मूल्यांकन (Overvaluation): कंपनी का मूल्यांकन अधिक हो सकता है।
तरलता जोखिम: शुरुआत में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो सकता है।
जानकारी की कमी: नई कंपनी के बारे में सीमित जानकारी।
बाजार की स्थिति: बाजार मंदी में IPO का प्रदर्शन खराब हो सकता है।
भाग ११: SME IPO क्या है?
SME IPO छोटे और मध्यम उद्यमों (Small and Medium Enterprises) के लिए होता है। इनकी प्रक्रिया मुख्य बोर्ड IPO से अलग होती है:
न्यूनतम आवेदन ₹१ लाख से शुरू।
विशेष SME एक्सचेंज पर लिस्टिंग (BSE SME, NSE Emerge)।
अधिक जोखिम (कंपनी छोटी होती है)।
भाग १२: IPO में सफलता के टिप्स
शोध करें: कंपनी का व्यवसाय, वित्तीय स्थिति, प्रतिस्पर्धा समझें।
प्रमोटर ट्रैक रिकॉर्ड: प्रमोटरों की पिछली कंपनियों का प्रदर्शन देखें।
IPO का उद्देश्य: फंड का उपयोग कहाँ होगा? अगर सिर्फ प्रमोटरों को निकासी के लिए है, तो सावधान।
मूल्यांकन (Valuation): P/E, P/B अनुपात उद्योग औसत से तुलना करें।
बाजार की स्थिति: सामान्यतः बुलिश बाजार में IPO बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
ग्रेडिंग और विश्लेषक रिपोर्ट्स देखें।
आवेदन समय: आखिरी दिन आवेदन करें ताकि ग्रेग सब्सक्रिप्शन रेशियो (जीएम) देख सकें।
भाग १३: IPO के बाद क्या होता है?
लॉक-इन अवधि (Lock-in Period):
प्रमोटरों के शेयरों पर लॉक-इन लागू होता है (आमतौर पर ३ वर्ष)।
अन्य प्री-IPO निवेशकों पर भी लॉक-इन हो सकता है।
लिस्टिंग दिवस:
शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडिंग शुरू।
सर्किट फिल्टर लागू होता है (कीमत में उतार-चढ़ाव सीमित)।
वित्तीय रिपोर्टिंग:
कंपनी को तिमाही और वार्षिक वित्तीय विवरण देना होता है।
भाग १४: प्रसिद्ध IPO सफलताएँ और असफलताएँ
सफल IPO:
मारुति सुजुकी (२००३): लिस्टिंग प्राइस ₹१२५, आज ₹१०,०००+।
TCS (२००४): लिस्टिंग प्राइस ₹८५०, आज ₹३,५००+।
ज़ोमेटो (२०२१): लिस्टिंग प्राइस ₹७६, पहले दिन ६५% प्रीमियम।
असफल IPO:
पे टीएम (One97 Communications, 2021): लिस्टिंग प्राइस ₹२,१५०, कुछ महीनों में ७५% गिरावट।
सबसे निवेश (२०१९): लिस्टिंग दिवस पर ही १७% गिरावट।
भाग १५: कराधान
IPO में निवेश पर कराधान सामान्य शेयरों जैसा ही है:
STCG: १ वर्ष से कम, १५%।
LTCG: १ वर्ष से अधिक, ₹१ लाख से अधिक लाभ पर १०%।
भाग १६: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. क्या IPO में आवेदन शुल्क लगता है?
A: नहीं, आवेदन शुल्क नहीं होता, लेकिन ब्रोकर ब्रोकरेज चार्ज कर सकता है।
Q2. एक व्यक्ति कितने आवेदन कर सकता है?
A: एक IPO में एक PAN से एक ही श्रेणी में एक आवेदन। अलग-अलग श्रेणी (रिटेल और NII) में अलग-अलग आवेदन कर सकते हैं।
Q3. IPO आवंटन न होने पर क्या होता है?
A: ब्लॉक राशि अनब्लॉक हो जाती है, ४-५ कार्य दिवसों में खाते में वापस आ जाती है।
Q4. क्या NRI IPO में आवेदन कर सकते हैं?
A: हाँ, लेकिन NRE/NRO खाते से और PIS (Portfolio Investment Scheme) के तहत।
Q5. IPO में कितने दिनों में शेयर मिलते हैं?
A: आवंटन के २-३ दिनों के भीतर डीमैट अकाउंट में।
भाग १७: प्रैक्टिकल टास्क (दिवस ६ के लिए)
SEBI की वेबसाइट पर जाएँ और वर्तमान में दायर DRHP की सूची देखें।
अपने ब्रोकर के ऐप पर IPO सेक्शन एक्सप्लोर करें।
पिछले ६ महीने के किसी एक IPO का विश्लेषण करें:
लिस्टिंग प्राइस vs आज की कीमत
GMP (Grey Market Premium) क्या था?
आवेदन कितने गुना (Subscription) हुआ था?
ASBA प्रक्रिया को समझने के लिए अपने बैंक की वेबसाइट पर जाएँ।
भाग १८: निष्कर्ष
IPO निवेशकों के लिए नई और रोमांचक कंपनियों में निवेश का एक शानदार अवसर है। लेकिन इसमें जोखिम भी है। सफलता के लिए गहन शोध, धैर्य और समझदारी से आवेदन करना आवश्यक है। IPO को लॉटरी या शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग अवसर के बजाय दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखें।
Key Takeaway:
IPO किसी कंपनी में शुरुआती निवेश का मौका है। सावधानी से शोध करें, कंपनी के मूल सिद्धांतों को समझें, और IPO को लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाएँ।